19 जनवरी 2026

विदेशों में भी छा गया शर्मा जी वेजिटेरियन रेस्टोरेंट, भारतीय खाने का ग्लोबल जलवा

 

भारतीय शाकाहारी भोजन की खुशबू अब सिर्फ भारत तक सीमित नहीं रही है। यह स्वाद दुनिया के कई देशों में लोगों की पसंद बन रहा है, और इसी बदलाव का सबसे बड़ा उदाहरण है शर्मा जी वेजिटेरियन रेस्टो। विदेशों में रहने वाले भारतीयों के साथ-साथ विदेशी नागरिक भी अब इस रेस्टोरेंट के पारंपरिक भारतीय शाकाहारी व्यंजनों के दीवाने हो चुके हैं।

खाड़ी और यूरोप में लोकप्रियता

शर्मा जी वेजिटेरियन रेस्टो ने सबसे पहले खाड़ी देशों में अपनी मजबूत पहचान बनाई। दुबई और अबू धाबी जैसे शहरों में इसके आउटलेट्स तेजी से लोकप्रिय हुए। यहाँ काम करने वाले भारतीय समुदाय के लिए यह रेस्टो घर के खाने जैसा अनुभव देता है, वहीं स्थानीय लोग भी भारतीय मसालों और शाकाहारी थाली का स्वाद लेने बड़ी संख्या में पहुँचते हैं।

यूरोप में भी यह रेस्टोरेंट अब जाना-पहचाना नाम बन चुका है। लंदन, मैनचेस्टर, पेरिस, जर्मनी

17 जनवरी 2026

नागपुर से नीदरलैंड तक: शिशु से मेयर तक की अद्भुत यात्रा

 

10 फरवरी 1985 को महाराष्ट्र के नागपुर में एक बच्चे का जन्म हुआ। जन्म के तीन दिन बाद ही उसकी माँ ने उसे छोड़ दिया। शिशु करीब एक महीने तक नागपुर की MSS संस्था में रहा, जो बेसहारा बच्चों और जरूरतमंद महिलाओं के लिए काम करती है। तभी मुंबई घूमने आए नीदरलैंड के एक दंपती ने उसे गोद लिया और यूरोप ले गए। संस्था की एक नर्स ने बच्चे का नाम “फाल्गुन” रखा, क्योंकि उसका जन्म फरवरी महीने में हुआ था।

फाल्गुन बिनेनडिज्क ने अपनी जिंदगी नीदरलैंड में बिताई और अब वे हीमस्टेड शहर के मेयर हैं। 41 साल बाद, उन्होंने अपने जन्मस्थान नागपुर लौटकर अपनी जन्मदात्री माँ को खोजने का फैसला किया। अधिकारियों के अनुसार, उनकी माँ उस समय 21 वर्ष की अविवाहित युवती थीं। सामाजिक दबाव और डर के कारण उन्होंने नवजात को MSS संस्था में छोड़ दिया।

फाल्गुन ने कहा, “मैंने महाभारत पढ़ा है और मुझे लगता है कि जैसे कर्ण को कुंती से मिलने का अधिकार था, वैसे ही हर संतान को अपनी माँ से मिलने का हक होना चाहिए।” 18 वर्ष की उम्र में वे पहली बार भारत आए थे, लेकिन इस बार उनका मकसद अलग है,माँ से मिलना। उन्होंने NGO, स्थानीय निकायों और पुलिस की मदद ली है ताकि उन्हें ढूंढा जा सके।

फाल्गुन बताते हैं, “मुझे लगता है कि वे आज भी उस फैसले के दर्द में होंगी। मैं बस उनसे मिलकर यह बताना चाहता हूँ कि मैं ठीक हूँ और खुश हूँ। उन्हें एक बार देखना चाहता हूँ।”

9 जनवरी 2026

2026 का ताज महोत्सव: आगरा शिल्प और संस्कृति का वैश्विक आकर्षण

 

आगरा, उत्तर प्रदेश: 2026 का ताज महोत्सव आगरा में इतिहास और आधुनिकता के संगम के रूप में आयोजित होगा और इस बार शिल्प और हस्तशिल्प पर विशेष ध्यान दिया जाएगा। यह महोत्सव केवल पर्यटन का अवसर नहीं होगा, बल्कि आगरा की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत, पारंपरिक शिल्प और स्थानीय कलाकारों को वैश्विक मंच पर पेश करने का एक अनोखा अवसर बनेगा।

ताज महोत्सव का इतिहास: ताज महोत्सव की शुरुआत 1992 में हुई थी, और तब से यह आगरा की संस्कृति और पर्यटन का प्रमुख कार्यक्रम बनता चला आ रहा है। 2026 में महोत्सव का आयोजन इस बार शिल्प-केंद्रित होगा, ताकि आगरा का पारंपरिक हस्तशिल्प, पार्चिनकारी, मोती की कारीगरी और अन्य कला रूप अंतरराष्ट्रीय पर्यटकों के लिए आकर्षण का केंद्र बनें।

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इस बार महोत्सव में आगरा के शिल्पियों को मुख्य आकर्षण बनाया जाएगा। कलाकार ताज नगरी के इतिहास और संस्कृति को अपनी कृतियों में जीवंत करेंगे और साथ ही उनके हस्तशिल्प की लाइव डेमो और कार्यशालाएँ आयोजित की जाएंगी। नृत्य, संगीत और थिएटर कार्यक्रम महोत्सव को और रंगीन बनाएंगे। आगरा की प्रसिद्ध मिठाइयाँ और स्थानीय व्यंजन भी अंतरराष्ट्रीय सैलानियों के अनुभव को यादगार बनाएंगे।

सैलानियों के लिए महोत्सव को और आकर्षक बनाने के लिए ताजमहल के आसपास नए selfie पॉइंट्स और सजावट की जाएगी। प्रशासन ट्रैफिक और नेविगेशन को सहज बनाने के लिए विशेष इंतजाम करेगा, ताकि पर्यटक महोत्सव का आनंद बिना किसी बाधा के ले सकें।

यह महोत्सव न केवल संस्कृति का उत्सव होगा, बल्कि स्थानीय अर्थव्यवस्था और शिल्पियों के लिए वैश्विक मंच भी बनेगा। होटल, छोटे व्यवसाय और हस्तशिल्प

7 जनवरी 2026

क्या आगरा सच में स्मार्ट सिटी बनकर आदर्श बन पाएगा

 

आगरा, जो ताजमहल के लिए पूरी दुनिया में जाना जाता है, अब केवल एक ऐतिहासिक और पर्यटन शहर नहीं बल्कि भविष्य का स्मार्ट शहर बनने की राह पर है। लेकिन सवाल यह उठता है कि क्या यह शहर सच में स्मार्ट सिटी बनकर आदर्श बन पाएगा ? स्मार्ट सिटी का मतलब सिर्फ तकनीक नहीं है। यह शहर को अधिक सुव्यवस्थित, सुरक्षित, स्वच्छ और रहने योग्य बनाने की दिशा में उठाया गया कदम है। आगरा के लिए यह कदम बहुत मायने रखता है, क्योंकि लाखों पर्यटक हर साल यहाँ आते हैं और शहर की रोजमर्रा की समस्याएँ भी अब चुनौती बन चुकी हैं।

स्मार्ट आगरा से यातायात की समस्या कम हो सकती है, स्मार्ट ट्रैफिक लाइट्स और डिजिटल सिग्नल के माध्यम से जाम में राहत मिलेगी और नागरिक और पर्यटक आसानी से शहर में घूम सकेंगे। इसके साथ ही, कचरा प्रबंधन, हरियाली बढ़ाना और सार्वजनिक जगहों की साफ-सफाई शहर को और रहने योग्य बनाएगी। डिजिटल सेवाओं और ई-गवर्नेंस के माध्यम से नागरिकों को हेल्थकेयर, शिक्षा और सरकारी सेवाओं में आसानी मिलेगी। साथ ही, बेहतर पर्यटन इंफ्रास्ट्रक्चर

30 दिसंबर 2025

ताज महोत्सव: आगरा की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व मंच पर चमकाने का अवसर

अगरा – ताज महोत्सव न केवल आगरा की पहचान है, बल्कि यह भारत की सांस्कृतिक धरोहर को विश्व स्तर पर उजागर करने का अवसर भी है। यदि इसे डिजिटल टेक्नोलॉजी, ग्लोबल कलाकारों, बेहतर सुविधाओं और मीडिया कवरेज के माध्यम से सही दिशा में प्रस्तुत किया जाए, तो यह महोत्सव न केवल भारत बल्कि पूरी दुनिया के कला प्रेमियों और पर्यटकों के लिए एक प्रमुख आकर्षण बन सकता है।

हालांकि ताज महोत्सव अभी मुख्यतः स्थानीय और राष्ट्रीय स्तर पर लोकप्रिय है, लेकिन इसे अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने की अपार संभावनाएँ हैं। सबसे पहले इसे ग्लोबल अपील देने के लिए नाम और ब्रांडिंग पर ध्यान देना जरूरी है। उदाहरण के लिए इसे “ताज ग्लोबल महोत्सव” या “ताज अंतरराष्ट्रीय सांस्कृतिक महोत्सव” के रूप में प्रस्तुत किया जा सकता है। ऐसा नाम महोत्सव को विश्व स्तर पर एक पहचान देगा और अंतरराष्ट्रीय दर्शकों को आकर्षित करेगा।

डिजिटल प्लेटफॉर्म और सोशल मीडिया का प्रभावी इस्तेमाल महोत्सव की ग्लोबल पहुंच बढ़ाने में अहम भूमिका निभा सकता है। महोत्सव की लाइव स्ट्रीमिंग, वीडियो क्लिप्स, रील्स और

24 दिसंबर 2025

मधुर जाफरी भारतीय भोजन की वैश्विक पहचान और आगरा से संबंध

 

भारतीय भोजन का स्वाद और विविधता पूरी दुनिया में प्रसिद्ध है, और इसमें विशेष योगदान देने वाली एक प्रमुख शख्सियत हैं मधुर जाफरी। भारतीय खाने को वैश्विक स्तर पर पहचान दिलाने वाली इस रचनात्मक रसोइया और लेखिका का जन्म दिल्ली में हुआ था, लेकिन उनका जीवन और उनके पाक कौशल को समझने में आगरा का भी एक महत्वपूर्ण स्थान है। आगरा के समृद्ध सांस्कृतिक और खाद्य धरोहर से उनका गहरा संबंध रहा है, जो भारतीय भोजन के प्रति उनके प्यार को और भी गहरा बनाता है।

मधुर जाफरी का भारतीय खाना और वैश्विक पहचान

मधुर जाफरी भारतीय खाने की सबसे प्रसिद्ध शख्सियतों में से एक हैं। उन्होंने भारतीय खाना को पश्चिमी दुनिया में एक नई पहचान दी। उनके द्वारा लिखी गई किताबें, जैसे "An Invitation to Indian Cooking", और उनका टीवी शो "Madhur Jaffrey's Indian Cookery" ने भारतीय व्यंजनों को पूरी दुनिया में लोकप्रिय किया।

मधुर जाफरी ने भारतीय स्वाद को पश्चिमी दुनिया में पहुँचाने का काम किया, और भारतीय रेसिपीज को सरल तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने भारतीय खाने की जटिलताओं को आसान और समझने योग्य बना दिया। उनके कार्यक्रमों और किताबों में भारतीय रेसिपीज का संकलन किया गया है, जिसमें आगरा के मशहूर मुगलाई व्यंजन जैसे तंदूरी कबाब और पैठा भी शामिल हैं।

आगरा और मधुर जाफरी का गहरा संबंध

मधुर जाफरी ने अपने लेखों और कार्यक्रमों में भारतीय भोजन के क्षेत्रीय स्वादों का बखूबी वर्णन किया है, और आगरा की पारंपरिक भोजन शैली पर भी ध्यान केंद्रित किया है। आगरा, जो अपने मुग़ल इतिहास और स्थापत्य के लिए प्रसिद्ध है, वहीं परंपरागत मुग़लई व्यंजन

22 दिसंबर 2025

अलीगढ़ के ताले क्यों हैं लोगों की पहली पसंद

 

भारत में जब भी मजबूत और भरोसेमंद ताले की बात होती है, सबसे पहले जो शहर याद आता है, वह है अलीगढ़। उत्तर प्रदेश का यह शहर न केवल शिक्षा और संस्कृति के लिए प्रसिद्ध है, बल्कि अपने विश्वविख्यात ताला उद्योग के लिए भी जाना जाता है। “अलीगढ़ का ताला” आज एक गुणवत्ता और सुरक्षा का ब्रांड बन चुका है।

अलीगढ़ के ताले का इतिहास

अलीगढ़ में ताले बनाने की परंपरा कई सदियों पुरानी है। कहा जाता है कि 18वीं शताब्दी में सुरक्षा की बढ़ती जरूरत के कारण स्थानीय कारीगरों ने हस्तनिर्मित ताले बनाना शुरू किया। लोहे और पीतल से बने ये ताले मजबूत, टिकाऊ और जटिल चाबी प्रणाली वाले होते थे।

शुरुआत में ये ताले पूरी तरह हाथ से बनाए जाते थे। इसलिए इन्हें तोड़ना या खोलना आसान नहीं था। धीरे-धीरे यह कला पीढ़ी दर पीढ़ी चली आई और अलीगढ़ का ताला उद्योग एक स्थापित पेशा बन गया।

अलीगढ़ के ताले क्यों हैं इतने लोकप्रिय

अलीगढ़ के तालों की लोकप्रियता केवल नाम के कारण नहीं है, बल्कि उनकी गुणवत्ता, मजबूती और सुरक्षा के कारण है। ये ताले लंबे समय तक टिकते हैं। स्थानीय कारीगरों की कुशलता और अनुभव हर ताले में झलकता है। इनकी किफायती कीमत और

21 दिसंबर 2025

धुंध में छिपा ताजमहल : आगरा की एक शांत और रहस्यमयी सुबह

 

आगरा की पहचान ताजमहल से है। हर सुबह, हर मौसम में ताजमहल अलग रूप में दिखाई देता है। लेकिन जब सर्दियों की धुंध आगरा पर छा जाती है, तो ताजमहल मानो धीरे-धीरे आंखों से ओझल हो जाता है। सफेद संगमरमर की यह ऐतिहासिक इमारत उस समय किसी तस्वीर की तरह लगती है, जिसे धुंध ने हल्के हाथों से ढक दिया हो।धुंध भले ही ताजमहल को पूरी तरह देखने न दे, लेकिन उसकी मौजूदगी महसूस होती रहती है।

धुंध ने बदला ताजमहल का नज़ारा

सुबह के समय जब यमुना किनारे घना कोहरा फैल जाता है, तो ताजमहल दूर से दिखाई देना बंद हो जाता है। कई पर्यटक निराश हो जाते हैं क्योंकि वे उसकी पूरी भव्यता नहीं देख पाते। वहीं कुछ लोग इस दृश्य को खास मानते हैं। उनका कहना होता है कि धुंध में ताजमहल और भी शांत, गहरा और भावनात्मक